जंतर मंतर की बातें

डॉ कमर फलाही

दुनिया इतनी बदल चुकी है कि अब अमेरिका भी चौधरी नहीं रहा। कोरिया एक छोटा सा देश है वह भी उसे आँख दिखता है .

8 अगस्त को जंतर-मंतर पर जो कहा गया, उसमें कोई नई बात नहीं है। कमजोरी, और कायरता का सबूत पेश किया  गया  है  वह  इसलिए कि केंद्र में उनकी बहुमत की सरकार है .

मुसलमान इस देश में अपने धैर्य की परीक्षा तब तक देते रहेंगे जब तक कि यहां के लोगों को  असली शरारतियों और और लुटेरों की पहचान नहीं हो जाती  ।

अगर मुसलमानों को लिंचिंग करने  वाला  किसी मुसलमान के घर में दाखिल भी हो जाएँ , तो भी मुसलमान उसे नहीं मारेंगे , अदालत का सम्मान करेंगे और उसे कानून के हवाले कर देंगे।

यदि मुसलमानों ने लिंचिंग का बदला लिया होता या ऐसा करने का इरादा किया होता, तो गैर-मुस्लिम भाइयों को कई जगहों पर मार दिया जाता, लेकिन मुसलमानों ने इस्लाम की सार्वभौमिक शिक्षाओं का सम्मान किया है ।

धरती पर अन्यायपूर्ण रक्तपात सबसे बड़ा दंगा है और इसे रोकना सबसे बड़ी देशभक्ति और सुधार है।

गृहयुद्ध किसी भी देश की शांति और विकास में बाधक होता है और मुसलमान इसका कभी समर्थन नहीं कर सकते।

आये दिन न जाने  कितने लोग बस और ट्रेन हादसों का शिकार होते हैं, भारत में मुसलमान भी लिंचिंग को एक दुर्घटना मानेंगे।

गैर-मुसलमानों को एकजुट करने के लिए ये गीदड़ भब्कियां दी  जा रहीं हैं, वरना दुनिया जानती है कि मुसलमानों के लिए ये कोई बड़ी बात नहीं है.

मुसलमान परीक्षा देने  के लिए पैदा हुए हैं।


लेकिन याद रखें कि हर सवाल का जवाब एक ही जवाब से नहीं दिया जा सकता।

‘गुजरात’ के बदले ‘केंद्र’  ‘मुजफ्फरनगर’ के बदले  ‘लखनऊ’ यह  फार्मूला हर बार और हर जगह काम नहीं करता, वरना  ‘बिहार’ और ‘बंगाल ‘पर विजय प्राप्त होती ।जनता इतनी मूर्ख नहीं है कि हर बार उसे ठग लिया जाए।


अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भी कुछ प्रभाव है , और सर्व शक्तिमान ईश्वर  की  भी निगरानी हो रही है।

म्यांमार की ‘सुकी’  ने फिरौन बनने का सपना देखा, लेकिन आज वह  जेल में चक्की पीस  रही है । जाहिर है, यह सब मुसलमानों ने नहीं बल्कि मानव जाति के सर्व शक्तिमान ईश्वर  ने किया है ।


रोटी  को सेंकने में भी थोड़ा समय लगता है, लेकिन ज्यादा सेंकने से रोटी  जल ​​भी जाती है।

यह बात  हर पहलू से याद रखने वाली है।


अपना तो  काम सिर्फ शांति साझा करना है, दंगाई  भी अपना काम करेंगे.

नोट : असल लेख उर्दू में डॉ कमर फलाही के फेसबुक पर प्रकाशित हुआ है ,एशिया टाइम्स ने इसका  हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया है 

 

1 comments

  • قمر فلاحی

    جزاکم اللہ سبحانہ الجنہ


    .

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