गाज़ा में इंसानियत का कत्लेआम, अल-अक्सा को ख़तरा — फ़िलिस्तीनी राजदूत अब्दुल्ला अबूशाविश का दोटूक बयान
संयुक्त राष्ट्र की प्रस्तावनाएँ केवल काग़ज़ी दिखावा, फ़िलिस्तीनी अपने ही देश में पराए बना दिए गए।
नई दिल्ली, 27 अक्तूबर:फ़िलिस्तीन में लगातार बढ़ते मानवीय संकट और ग़ज़ा में हो रही भारी तबाही पर चिंता जताते हुए भारत में फ़िलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला अबूशाविश ने कहा कि “यह कोई युद्ध नहीं, बल्कि इंसानियत के ख़िलाफ़ एक योजनाबद्ध नरसंहार है।” उन्होंने कहा कि इस्राइली हमलों ने मानवीय ज़मीर को झकझोर कर रख दिया है और अब समय आ गया है कि पूरी दुनिया न्याय के लिए खड़ी हो।
राजदूत अबूशाविश इंडियन मुसलिम्स फॉर सिविल राइट्स (IMCR) द्वारा आयोजित एक अनौपचारिक बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि फ़िलिस्तीनी जनता को उनकी ही ज़मीन पर अजनबी बना दिया गया है। “हमारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने वाले हमें ही घुसपैठिया कह रहे हैं — यह न सिर्फ़ अन्याय है बल्कि इंसानियत का अपमान भी है।”
राजदूत ने संयुक्त राष्ट्र की निष्क्रियता पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि “अगर संयुक्त राष्ट्र अपनी ही पारित प्रस्तावों को लागू नहीं करवा सकता, तो उसके सारे मानवीय और शांति के दावे बेमानी हैं। दशकों से पारित प्रस्तावों के बावजूद अगर फ़िलिस्तीनी जनता को न्याय नहीं मिलता, तो यह संस्था अपनी नैतिक साख खो चुकी है।”
बैठक में कई प्रमुख हस्तियाँ मौजूद थीं — पूर्व सांसद और IMCR के अध्यक्ष मोहम्मद अदीब, पटना हाइकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश इक़बाल अहमद अंसारी, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील फ़ुज़ैल अय्यूबी, गांधियन प्रोफेसर वी.के. त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता और ऑल इंडिया पीस मिशन के अध्यक्ष डॉ. दया सिंह, फ़्रीडम प्रेस के रेज़िडेंट एडिटर अंज़रुल बारी, ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद इलियास सैफ़ी, और उद्योगपति ज़ैनुल आबिदीन शामिल थे।
राजदूत अबूशाविश ने कहा कि मस्जिद अल-अक्सा को ख़तरा केवल फ़िलिस्तीन या किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरी मुस्लिम उम्मत की अस्मिता और इज़्ज़त का मामला है। उन्होंने कहा कि इस्राइली हिंसा सिर्फ़ मानवाधिकारों का नहीं, बल्कि वैश्विक ज़मीर का भी इम्तिहान है।
उन्होंने आगे कहा कि वेस्ट बैंक, ग़ज़ा और अन्य कब्ज़े वाले इलाक़ों में जो अत्याचार हो रहे हैं, वे यह दिखाते हैं कि यह संघर्ष केवल ज़मीन का नहीं बल्कि इंसानियत और बुनियादी मूल्यों का सवाल बन चुका है।
सभी वक्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और ख़ास तौर पर मुस्लिम देशों से अपील की कि वे एकजुट होकर इस्राइली हमलों को रोकने, तुरंत और पूरे तौर पर युद्धविराम को लागू कराने, मानवीय सहायता शुरू करने और फ़िलिस्तीनी जनता को न्याय दिलाने के लिए ठोस कदम उठाएँ।
बैठक के अंत में एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें फ़िलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता, मानवाधिकारों के सम्मान और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की माँग की गई।

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