मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स पहली बार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में :
पांच विभिन्न भाषाओं अरबी, अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम तथा उर्दू के प्रकाशन का प्रस्तुतीकरण शामिल
Global Conference of Human Fratern
नई दिल्ली : एशिया टाइम्स न्यूज़ ll मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला में भाग ले रहा है जो 25 फरवरी से रविवार 5 मार्च 2023 तक जारी रहेगा| इसमें पांच विभिन्न भाषाओं अरबी, अंग्रेजी, हिंदी, मलयालम तथा उर्दू के प्रकाशन का प्रस्तुतीकरण शामिल होगा, जो काउंसिल के स्टैंड पर होने वाली विभिन्न गतिविधियों के साथ किया जाएगा|
काउंसिल अल-अज़हर के ग्रैंड इमाम तथा मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स के अध्यक्ष ख्यातिप्राप्त डॉक्टर अहमद अल तैयब द्वारा हिंदी में कुल 5 पुस्तकें प्रस्तुत करेगा जिनके नाम हैं, 'अल-अजहर तथा मुस्लिम एकता' उर्दू में, 'जिहाद को समझना' हिंदी तथा उर्दू में, 'युवाओं से एक शब्द' मलयालम तथा उर्दू में, ‘पूर्वी बातचीत पर मेरे विचार' उर्दू में, 'शांति वार्ता' उर्दू तथा मलयालम में|

काउंसिल द्वारा पहली बार ' पोप एवं ग्रैंड इमाम: एक कंटीला रास्ता' नामक पुस्तक का उर्दू संस्करण प्रदर्शित किया जाएगा जिसे मुस्लिम काउंसिल ऑफ एल्डर्स के महासचिव जज मोहम्मद अब्दुसलाम ने लिखा है| यह पुस्तक इंसानी भाईचारा दस्तावेज के जन्म का इतिहास बताती है जिसपर हिज़ होलीनेस पोप फ्रांसिस तथा अल-अजहर के ग्रैंड इमाम, ख्यातिप्राप्त अहमद अल तैयब, ने आबू धाबी में 4 फरवरी 2019 को सह-हस्ताक्षर किए थे तथा जिसमे संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति ख्यातिप्राप्त शेख मोहम्मद बिन जायेद अल नह्यान की भूमिका भी थी|
काउंसिल सम्मेलनों तथा व्याख्यानों की श्रृंखला का भी आयोजन करेगा जिसमें वार्तालाप, सह अस्तित्व तथा इंसानी भाईचारे पर चर्चा होगी तथा साथ ही साथ भावी सहयोग के उद्देश्य से प्रमुख क्षेत्रीय प्रकाशकों से भी बातचीत की जाएगी| काउंसिल विभिन्न भारतीय धार्मिक नेताओं तथा सामाजिक एवं सामुदायिक कलाकारों, विश्वविद्यालय विद्यार्थियों तथा प्रोफेसरों को भी आमंत्रित करेगा ताकि उनके सामने काउंसिल के विजन तथा मूलभूत संदेश प्रस्तुत कर सकें|

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला, जिसे एशिया के एक प्रमुख साहित्यिक कार्यक्रम के रूप में देखा जाता है, उसमें काउंसिल की यह प्रथम भागीदारी है| इससे पहले, काउंसिल ने हाल ही में संपन्न हुए काहिरा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला में भाग लिया, जो साहित्यिक माध्यमों द्वारा सहिष्णुता एवं सह अस्तित्व को बढ़ावा देने के काउंसिल के संपूर्ण विजन का ही हिस्सा था|

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