हर बच्चे के लिए मूलभूत शिक्षा ज़रूरी ; मेरा मदारिस के जिम्मेदारों को मशवरा है कि आप अंग्रेज़ी और गणित ज़रूर पढाएं : डॉ ऐनुल हसन कुलपति मानू

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय की स्थापना 1998 में हुई थी, डॉ ऐनुल हसन विश्विद्यालय के पांचवे कुलपति हैं

नई दिल्ली : (एशिया टाइम्स / शादाब खान की रिपोर्ट)

मौलाना आज़ाद नेशनल उर्दु युनिवर्सिटी (MANUU) के नए कुलपति डॉ ऐनुल हसन ने एशिया टाइम्स को दिये गए इंटर्व्यू में कहा कि मदरसों में अंग्रेज़ी और गणित की पढ़ाई भी होनी चाहिए।

इस मश्वरे के पीछे डॉ हसन का मक़सद था कि मदरसे के विद्यार्थी पढ़ाई पूरी करने के बाद विश्वविद्यालयों में दाख़िला ले सकें। 

जब डॉ ऐनुल हसन से सवाल किया गया कि क्या विश्वविद्यालय उनकी अध्यक्षता में कोई ऐसा कार्यक्रम चलाएगा जिससे मदरसे से पढ़कर निकलने वाले विद्यार्थी युनिवर्सिटी में दाख़िला लेने के क़ाबिल बन जाएं, तो उन्होंने जवाब दिया कि वे इस काम के लिए तैयार हैं लेकिन मदरसों को भी आगे आना होगा।

उन्होंने कहा, “:मेंरा बहुत से मदारिस से वास्ता रहा है। मैं हिन्दुस्तान के मदारिस में जाता रहा हूं। मैंने इनमें हमेशा वहां के विद्यार्थियों और संचालकों को मशवरा दिया है कि आप दो अध्यापक ज़रूर रखें, अंग्रेज़ी और गणित। यह दो विषय ज़रूर पढ़ाएं, चाहे वो किसी सीमित समय के लिए ही हो।

लेकिन मूलभूत शिक्षा ज़रूरी है, ताकि आलिम, फ़ाज़िल और कामिल बनने वाले विद्यार्थियों को दोबारा हाई स्कूल और इंटर न करना पड़े। अगर आप अपने सिलेबस में यह विषय रखेंगे तो बच्चों की मार्कशीट पर इनका नाम होगा, और अगर इनका नाम होगा तो यह आगे युनिवर्सिटी से डिग्री ले सकते हैं।

मैं इसमें भरपूर सहयोग करने के लिए तैयार हूं, बशर्ते मदारिस भी हमारे साथ सहयोग करें। मुझे उम्मीद है कि एक सिलसिला शुरू होगा और इस सिलसिले को लेकर हम आगे बढ़ेंगे 

जब डॉ हसन से उर्दू को रोज़गार से जोड़ने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि इस युनिवर्सिटी को बनाने का उद्देश्य ही उर्दू भाषा को बढ़ावा देना है।

मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय की स्थापना 1998 में हुई थी। डॉ ऐनुल हसन विश्विद्यालय के पांचवे कुलपति हैं।

 पूरा इंटर्व्यू इस लिंक पर क्लिक करके देखा जा सकता है 

 An Exclusive Interview with VC of MANUU, Dr Ainul Hassan Abidi : Asia Times

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