तालिबान के टेकओवर पर यह कह रहे हैं दूसरे देश
अब तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान में सिर्फ़ रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान के ही राजदूत काम कर रहे हैं।
15 अगस्त 2021 को तालिबान ने क़ाबुल पर पूरी तरह क़ब्ज़ा कर लिया। सत्ता हाथ में आते ही तालिबान ने एक प्रेस कॉंफ्रेंस भी की जहां औरतों को उनके अधिकार देने जैसे कई दावे किये गए। तालिबान ने यह भी कहा कि उसे अर्थव्यवस्था को वापिस खड़ा करने के लिए बाक़ी दुनिया की मदद चाहिए। हालांकि तालिबान के टेकओवर पर दीगर मुमालिक की राय में इख़्तेलाफ़ है।
सोमवार के दिन सऊदी अरब ने अफ़ग़ानिस्तान के तमाम दावेदारों से जान और माल की हिफ़ाज़त करने की अपील की। सऊदी विदेश मंत्रालय द्वारा ट्विटर पर जारी एक बयान में कहा गया है कि राज्य "उन विकल्पों के साथ खड़ा है जो अफगान लोग बिना किसी हस्तक्षेप के चुनते हैं," यह आशा व्यक्त करते हुए कि मध्य एशियाई राज्य में स्थिति जल्द से जल्द स्थिर हो जाए।
तुर्की ने मंगलवार को तालिबान से आए "सकारात्मक संदेशों" का स्वागत करते हुए कहा कि वह अब इन संदेशों के कार्रवाई में बदलने का इंतजार कर रहा है। तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कैवुसोग्लु ने अम्मान में अपने जॉर्डन के समकक्ष अयमान सफ़दी के साथ एक प्रेस कॉंफ्रेंस में कहा “मैं यह स्वीकार करना चाहूंगा कि तालिबान से विदेशियों, राजनयिक मिशनों और उसके लोगों को जो संदेश आए हैं, वे अब तक सकारात्मक रहे हैं। उम्मीद है, इसे कार्रवाई में बदला जाएगा”।
अफगानिस्तान में रूसी राजदूत ने कहा कि उन्होंने रूसी राजनयिक मिशन की सुरक्षा पर चर्चा करने के लिए काबुल में तालिबान प्रतिनिधियों के साथ रचनात्मक और सकारात्मक बैठक की। अफगानिस्तान पर मंगलवार की बैठक की घोषणा क्रेमलिन के दूत ज़मीर काबुलोव ने की थी, उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान ने पहले ही रूसी दूतावास के बाहरी परिधि की रक्षा करना शुरू कर दिया है। राजदूत दिमित्री ज़िरनोव ने मंगलवार को रूसी राज्य टीवी को बताया कि यह बैठक विशेष रूप से दूतावास की सुरक्षा के लिए समर्पित थी और इसमें शहर के वरिष्ठ तालिबान प्रतिनिधि शामिल थे जो अफगान राष्ट्रीय सुरक्षा बलों के अवशेषों के आत्मसमर्पण को स्वीकार कर रहे थे।
तालिबान के देश पर कब्ज़ा करने के बाद चीन के एक सरकारी प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि चीन अफगानिस्तान के साथ "मैत्रीपूर्ण और सहयोगात्मक" संबंधों को गहरा करने के लिए तैयार है। बीजिंग ने अफगानिस्तान से अमेरिका की वापसी के दौरान तालिबान के साथ अनौपचारिक संबंध लगातार क़ायम रखे हैं। चीन अफगानिस्तान के साथ 76 किलोमीटर (47 मील) की एक ऊबड़-खाबड़ सीमा साझा करता है। बीजिंग को लंबे समय से डर था कि शिनजियांग के संवेदनशील सीमा क्षेत्र में अफगानिस्तान अल्पसंख्यक वीग़र मुसलमानों के लिए एक मंच बन सकता है।
कतर के विदेश मंत्री ने मंगलवार को खाड़ी राज्य में एक बैठक के दौरान अफगानिस्तान में नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोहा में तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख से मुलाकात की। हाल के हफ्तों में दोहा ने तालिबान पर दबाव बढ़ा दिया है। क़तर में तालिबान का एक राजनीतिक कार्यालय भी है। यह अपील मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी और तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख मुल्ला अब्दुल गनी बरादर के बीच दोहा में एक बैठक के ठीक बाद हुई।
यूएई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि तालिबान के बयान "उत्साहजनक" हैं। यूएई के राष्ट्रपति के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गश ने कहा कि "राष्ट्र बदले से नहीं, बल्कि माफी, बातचीत और सहिष्णुता के माध्यम से बनते हैं।" उन्होंने ट्विटर पर कहा कि "हमें उम्मीद है कि अफगान शांति और समृद्धि के पक्ष में दुख के पन्ने पलटेंगे।" दूसरी तरफ़ यूएई सरकार ने तालिबान सरकार के साथ राजनयिक संबंध तोड़ने का फैसला किया है।
हालांकि इन सब देशों के बीच कैनेडा ने तालिबान को तस्लीम करने से मना कर दिया है। कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा है कि उनकी सरकार की तालिबान को अफगानिस्तान की वैध सरकार के रूप में मान्यता देने की कोई योजना नहीं है। सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार ट्रूडो ने कहा “कनाडा की तालिबान को अफगानिस्तान की सरकार के रूप में मान्यता देने की कोई योजना नहीं है। जब वे 20 साल पहले सरकार में थे, कनाडा ने उन्हें मान्यता नहीं दी थी,”। उन्होंने मंगलवार को कहा, "हमारा ध्यान अभी अफगानिस्तान से लोगों को बाहर निकालने पर है और तालिबान को हवाई अड्डे तक लोगों की मुफ्त पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत है।"
पाकिस्तान सरकार ने तालिबान के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान तो जारी नहीं किया लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक बयान जारी कर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान ने ग़ुलामी की बेड़ियां तोड़ ली हैं। दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के इंटीरियर मिनिस्टर ने भी बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने अफ़ग़ान तालिबान को प्रतिबंधित संगठन पाकिस्तान तहरीक-ए-तालिबान के मुद्दे पर साथ ले लिया है। पीटीटी पाकिस्तान का एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है जो मलाला यूसुफ़जई पर हमला करने के अलावा कई बम धमाकों के लिए भी ज़िम्मेदार है।
अब बात करते हैं हमारे देश भारत की। भारत ने अभी तक तालिबान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि हमारे मुल्क के लोगों को अफ़ग़ानिस्तान से लगातार वापिस लाया जा रहा है। अफ़ग़ानिस्तान में मौजूद भारतीय दूतावास को भी बंद कर दिया गया है। अब तालिबान शासित अफ़ग़ानिस्तान में सिर्फ़ रूस, चीन, ईरान और पाकिस्तान के ही राजदूत काम कर रहे हैं। यह भी अपने आप में एक पॉलिटिकल स्टेटमेंट है।

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