ट्रंप का दावा: भारत अमेरिकी सामान पर जीरो-टैरिफ करने को तैयार, लेकिन अब हो चुकी बहुत देर

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका-भारत के रिश्ते लंबे समय से 'एकतरफा' रहे हैं और भारत रूस से अधिक सामान खरीद रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सोमवार को भारत को लेकर एक बार फिर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार लंबे समय से ‘एकतरफा’ रहा है। साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि भारत ने अमेरिकी सामान पर लगने वाले टैरिफ को ‘जीरो’ करने की पेशकश की है, लेकिन अब बहुत देर हो चुकी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि अमेरिका भारत को बहुत कम सामान बेचता है, जबकि भारत अमेरिका को भारी मात्रा में अपना सामान बेचता है। उनके मुताबिक, यही वजह है कि यह रिश्ता दोनों देशों के बीच सालों से असंतुलित बना हुआ है। साथ ही ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका के मुकाबले रूस से बहुत अधिक सामान खरीदता है।

व्यापार वार्ता और रूस से जुड़ा विवाद

ट्रंप का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी तनाव में हैं। ट्रंप प्रशासन ने भारतीय सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है। इनमें से 25 फीसदी टैरिफ रूस से तेल खरीदने के एवज में लगाया गया है। अमेरिका का कहना है कि भारत रूस से ज्यादातर तेल और हथियार लेता है, जबकि अमेरिका से बहुत कम खरीदता है। साथ ही ट्रंप बराबर यह दावा करते रहते हैं कि भारत द्वारा रूस से तेल खरीदने की वजह से ही यूक्रेन युद्ध लंबा खींच रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच छठे दौर की व्यापार वार्ता भी रद्द कर दी गई थी। अब तक दोनों देशों के बीच पांच दौर की बातचीत हो चुकी है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि भारत के कृषि और पशुपालन क्षेत्रों तक पहुंच इस वार्ता में एक बड़ा विवाद है।

मोदी का चीन दौरा

ट्रंप की ये टिप्पणी उस वक्त आई है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हाल ही में चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट में शामिल हुए। वहां उन्होंने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। समिट से पहले तीनों नेताओं को एक साथ हंसते और बातचीत करते देखा गया। पुतिन और मोदी हाथों में हाथ डालकर चलते हुए दिखाई दिए और उनके साथ शी जिनपिंग भी थे। इस मुलाकात को एशिया में बदलते समीकरणों का संकेत माना जा रहा है।

इसके अलावा भारत अमेरिका और यूरोपीय संघ की आलोचना भी करता रहा है, जब रूस से कच्चा तेल खरीदने पर उसे निशाना बनाया जाता है। भारत का तर्क था कि उसकी तेल खरीद आर्थिक कारणों से है लेकिन इसके लिए उसे लगातार निशाना बनाना गलत है। हालांकि, अभी तक भारत सरकार की ओर से ट्रंप के ताजा बयान पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

 

 

 

 

courtesy:hindi.business-standard.com

 

0 comments

Leave a Reply