मदरसों के सर्वे पर UP मदरसा बोर्ड की आपत्ति

अखिलेश त्रिपाठी की रिपोर्ट 

लखनऊ | उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा मदरसों का निरीक्षण करने और उनको नोटिस जारी करने का विरोध किया है और गहरी नाराज़गी जताई है। यही नहीं, उन्होंने कहा है कि मदरसों के निरीक्षण करने का अधिकार केवल अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को है।

 यूपी में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने अपने बयान से योगी आदित्यनाथ की सरकार को मुश्किल में डाल दिया है। इसकी वजह योगी आदित्यनाथ की सरकार और उनके मातहतों, अधिकारियों द्वारा मदरसों को लेकर की जा रही मनमानी है।

यही वजह है कि मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद अब सरकार के द्वारा किए जाने वाले गलत कामों का खुलकर विरोध करने लगे हैं। इसी कड़ी में डॉ इफ्तिखार अहमद जावेद ने यूपी में मदरसों का निरीक्षण करने और उनको नोटिस जारी करने पर कड़ा विरोध किया है और गहरी नाराज़गी जताई है।

 इंडिया टुमारो  की रिपोर्ट  के मुताबिक  यूपी में अक्सर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा अचानक मदरसों का निरीक्षण किया जाता है। निरीक्षण करने के बाद उनके द्वारा मदरसों को नोटिस जारी कर दिया जाता है और मदरसा संचालन करने वाले लोगों को परेशान किया जाता है। साथ ही मदरसों को बंद करने की धमकी दी जाती है और मदरसों पर जुर्माना लगाया जाता है।

उदाहरण के लिए राज्य का बागपत जिला है, जहां पर कई मदरसों को नोटिस जारी किया गया है और उनके ऊपर जुर्माना लगाया गया है। राज्य में शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा इस तरह का गलत काम करने की जानकारी जब मदरसा बोर्ड चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद को हुई, तो उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया। लेकिन इसके बावजूद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मदरसों का निरीक्षण करना और उनको नोटिस जारी करना बंद नहीं किया।

यही कारण है कि अब मदरसा बोर्ड चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने खुलकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी करने का विरोध किया है और गहरी नाराज़गी जताई है। डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने इस संबंध में कहा है कि, “मदरसों के निरीक्षण करने का अधिकार अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं है। शिक्षा विभाग के दखल से मदरसों में असहजता की स्थिति पैदा हो रही है। अक्सर संज्ञान में आ रहा है कि शिक्षा विभाग के अधिकारी मदरसों का निरीक्षण करने के साथ नोटिस भी दे रहे हैं, जो मदरसा अधिनियम के खिलाफ है।”

डॉ. इफ्तिख़ार अहमद जावेद ने अपनी बात को रखते हुए आगे कहा है कि, “1995 में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के गठन के बाद मदरसों का समस्त कार्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। इसके बाद उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम 2004 प्रतिस्थापित किया गया। जिसके माध्यम से उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमावली 2016 बनाई गई। अधिनियम और विनियमावली के तहत अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अलावा किसी भी विभाग के अधिकारी द्वारा न तो निरीक्षण किया जाएगा और न ही किसी प्रकार की नोटिस दी जा सकती है।”

मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने मदरसा विनियमावली के नियमों का अनुपालन कराने के लिए यूपी के सभी जिलों के जिलाधिकारी को इस संबंध में एक पत्र भिजवाया है। यूपी के समस्त जिलों के जिलाधिकारी मदरसा बोर्ड चेयरमैन के पत्र को कितनी तवज्जो देते हैं, यह तो आगे चलकर ही पता चलेगा। लेकिन मदरसा बोर्ड चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने यूपी के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उनके अधिकार और सीमा बताकर योगी आदित्यनाथ की सरकार के अधिकारियों द्वारा मदरसों में अनावश्यक हस्तक्षेप का विरोध कर योगी सरकार को एक बड़ा संदेश दिया है।

इस संदेश से भाजपा अछूती नहीं रहेगी। डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने इसके पहले यूपी में योगी सरकार द्वारा मदरसों का सर्वे कराने और सर्वे के दौरान बगैर मान्यता के चलने वाले मदरसों को अवैध बताने का खुलकर विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि, “मदरसों को अवैध न कहा जाए, क्योंकि मदरसे अवैध नहीं हैं। मदरसों को लेकर उल्टी-सीधी भाषा न बोली जाए।” उनके इस तरह की बात कहने पर योगी आदित्यनाथ की सरकार असहज हो गई थी।

 

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