लव जिहाद के नक़ली मामले में फंसाए गए युवक को मिली ज़मानत
युवक के ऊपर धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत केस दर्ज कर लिया गया। साथ ही युवक पर एससी/एसटी अधिनियम और यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण अधिनियम के चार्ज भी लगा दिये गए।
नई दिल्ली : बीते दिसंबर उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक मुस्लिम युवक को लव जिहाद के आरोप में जेल हो गई थी। मंगलवार के दिन उस युवक को रिहा कर दिया गया। वह युवक अपनी एक दलित दोस्त के साथ घूम रहा था जब कुछ गुंडों ने उन्हें घेर लिया। गुंडों ने उनकी लाठी डंडों से पिटाई की। दोनों का धर्म पता चलने पर वे उन्हें पुलिस थाने ले गए।
पुलिस थाने में युवक के ऊपर धर्मांतरण विरोधी कानून (anti-conversion law) के तहत केस दर्ज कर लिया गया। साथ ही युवक पर एससी/एसटी अधिनियम (SC/ST Act) और यौन उत्पीड़न से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO) के चार्ज भी लगा दिये गए।
मानवाधिकार संगठनों के राष्ट्रीय परिसंघ (NCHRO) के यूपी प्रकरण ने इस मामले पर बारीकी से नज़र रखी है। परिसंघ के यूपी प्रकरण के महासचिव एडवोकेट मसरूफ़ कमाल ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि युवक को ग़लत तरीक़े से क़ैद किया गया था। 15 जून 2021 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी को ज़मानत दे दी।
एडवोकेट मसरूफ़ कमाल का कहना है कि उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी कानून का इस्तेमाल मुसलमानों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। इसका एक और मक़सद यह है कि औरतों का अपने ऊपर इक़तेदार ख़त्म कर दिया जाए। ज्यादातर मामलों में केस दर्ज करने वाला व्यक्ति कोई अधिकारी नहीं बल्कि भगवा ब्रिगेड के ठग होते हैं। इन्होंने यह ज़िम्मेदारी अपने ऊपर ले ली है कि औरतें और अल्पसंख्यक अपनी ज़िन्दगी सुकून से न जिएं।

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