ऑस्ट्रेलिया चुनाव में लेबर पार्टी जीती:21 साल में दूसरी बार PM बनने वाले पहले नेता होंगे अल्बनीज; खुद की सीट हार गए विपक्षी उम्मीदवार
ऑस्ट्रेलिया में लेबर पार्टी दोबारा चुनाव गई है। चुनाव आयोग के मुताबिक अब तक 60% वोटों की गिनती हो चुकी है। लेबर पार्टी को 89 सीटों पर जीत हासिल हुई है, वहीं विपक्षी लिबरल-नेशनल गठबंधन 36 सीटों पर जीती है। चुनाव जीतने के लिए 76 सीटों की जरूरत होती है।
लेबर पार्टी की जीत से तय हो गया है कि एंथनी अल्बनीज एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनेंगे। 21 साल में यह पहली बार होगा जब कोई नेता दोबारा PM बनेगा। इसे पहले 2004 में लिबरल पार्टी के जॉन हावर्ड लगातार दूसरी बार चुनाव जीते थे।
वहीं, विपक्षी लिबरल-नेशनल गठबंधन ने हार मान ली है। विपक्षी उम्मीदवार पीटन डटन अपनी खुद की सीट भी हार गए हैं। डटन का डिक्सन संसदीय सीट हारना सदी की सबसे बड़ी राजनीतिक हारों में गिनी जा रही है।
विपक्षी नेता पीटर डटन ने चुनाव में हार स्वीकार करते हुए कहा, "हमने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया, मैं इसके लिए पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।"

ऑस्ट्रेलिया में 3 साल पर होते हैं चुनाव ऑस्ट्रेलिया में 3 साल पर चुनाव होते हैं। देश में 28 मार्च 2025 को संसद भंग कर दी गई थी, जिसके बाद सरकार केयरटेकर मोड में चली गई थी। इसके बाद 22 से 30 अप्रैल तक पोस्टल वोटिंग की गई।
पिछली बार 2022 में हुए चुनाव में लेबर पार्टी को 77 और लिबरल-नेशनल गठबंधन को 58 सीटें मिली थीं। इस बार मुख्य मुकाबला प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की लेबर पार्टी और विपक्षी नेता पीटर डटन के लिबरल-नेशनल गठबंधन के बीच था।
ऑस्ट्रेलिया में चुनाव से जुड़ीं 4 तस्वीरें...




ऑस्ट्रेलिया में सभी को वोट डालना जरूरी
ऑस्ट्रेलिया में भारत की तरह ही दो सदन हैं। ऊपरी सदन को सीनेट और निचले सदन को हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स कहा जाता है। निचले सदन में बहुमत पाने वाली पार्टी या गठबंधन का नेता ही प्रधानमंत्री बनता है। इसकी 150 सीटों के लिए आज वोटिंग हो रही है। इसका रिजल्ट 3 मई की रात या फिर 4 मई की सुबह तक आएगा।
निचले सदन के साथ ही ऊपर सदन की 76 में से 40 सीटों के लिए भी आज वोटिंग हो रही है। इस सदन में चुने गए सदस्यों का कार्यकाल 6 साल होता है। हर 3 साल में आधे सदस्य बदल जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में 18 साल या इससे ज्यादा उम्र के सभी नागरिकों को अनिवार्य रूप से वोट देना होता है और अगर गैर जरूरी कारण से वो ऐसा नहीं करते हैं तो उन पर 20 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यहां प्रधानमंत्री बनने के लिए उम्र तय नहीं है। दूसरे शब्दों में कहें तो 18 साल या ज्यादा उम्र के जो लोग वोटिंग कर सकते हैं, वो चुनाव भी लड़ सकते हैं और प्रधानमंत्री भी बन सकते हैं।


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