इंडोनेशिया के लोगों ने वापस भेजे 250 रोहिंग्या रिफ्यूजी:लकड़ी की बोट से समंदर किनारे पहुंचे थे, लोगों ने जबदस्ती समुद्र में पहुंचा दी नाव
इंडोनेशिया के एचे राज्य के एक समुद्री किनारे पर गुरुवार शाम 250 रोहिंग्या लकड़ी की नाव से पहुंचे। स्थानीय लोगों ने उनके साथ बदसलूकी की। दो बार इन लोगों ने वहां रुकने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे।
इंडोनेशियाई लोगों ने इन्हें उसी लकड़ी की नाव के जरिए गहरे समंदर के सफर पर भेज दिया। फिलहाल, किनारे से वापस समंदर में जाने के बाद इन लोगों की लोकेशन नहीं मिल सकी है। शुक्रवार को न्यूज एजेंसी ‘एएफपी’ से बातचीत में स्थानीय लोगों ने घटना की पुष्टि की।

तीन हफ्ते पहले बांग्लादेश से चले थे
- उत्तरी एचे के लोगों का कहना है कि रोहिंग्या रिफ्यूजियों ने तीन हफ्ते पहले बांग्लादेश से सफर शुरू किया था और इसके बाद यहां पहुंचे थे। इस बोट में कई महिलाएं और बच्चे थे।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक- जैसे ही रोहिंग्या मुस्लिमों से भरी बोट किनारे पहुंची तो स्थानीय लोग जुट गए। इन्होंने रिफ्यूजियों से कहा कि वो फौरन जहां से आए हैं, वहीं लौट जाएं। इसके बाद कुछ झड़प भी हुई।
- कुछ रोहिंग्या इतने थके थे कि वो वापसी के लिए बोट में तो बैठ गए, लेकिन कुछ दूरी पर एक और किनारे पर जाकर आराम करने के लिए लेट गए। स्थानीय लोग यहां भी पहुंच गए और उन्हें जबरदस्ती लकड़ी की उसी नाव में बिठा दिया। इसके बाद इस नौका को समंदर में भेज दिया गया।

नाव की लोकेशन नहीं मिल रही
- न्यूज एजेंसी के मुताबिक- इंडोनेशिया के किनारे से भगाए जाने के बाद रिफ्यूजियों से भरी इस नाव का कोई पता-ठिकाना नहीं मिल रहा है। हर साल म्यांमार से भगाए गए रोहिंग्या शरणार्थी इसी तरह अलग-अलग देशों में पनाह लेने की कोशिश करते हैं। इनमें से कई की सफर के दौरान मौत की खबरें इंटरनेशनल मीडिया में आती रही हैं।
- बांग्लादेश में रोहिंग्या मुस्लिमों की बहुत बड़ी आबादी है। ये सभी म्यांमार से ही यहां पहुंचे हैं। अब इन्हें वहां से भी निकाला जा रहा है। इसके बाद इन लोगों की पहली कोशिश मलेशिया या इंडोनेशिया पहुंचने की कोशिश होती है। इसकी वजह यह है कि ये दोनों ही मुस्लिम देश हैं। इसके बावजूद रोहिंग्याओं को किसी तरह की मदद देने के लिए तैयार नहीं हैं।

बोझ बन गए हैं रोहिंग्या रिफ्यूजी
- न्यूज एजेंसी से बातचीत में इंडोनेशिया के एचे प्रांत के एक लोकल लीडर सैफुल अफवादी ने कहा- हम इन लोगों से तंग आ गए हैं। वो यहां आते हैं। इनमें से कुछ न जाने कहां गायब हो जाते हैं। सही बात तो ये है कि कुछ एजेंट्स के जरिए मानव तस्करी यानी ह्यूमन ट्रैफिकिंग हो रही है।
- रिपोर्ट्स के मुताबिक- पिछले सप्ताह करीब 600 रोहिंग्या रिफ्यूजी पश्चिमी इंडोनेशिया पहुंचे थे। इसके बाद इसी हफ्ते मंगलवार को 196 और इसके बाद अगले दिन यानी बुधवार को 147 लोग और पहुंचे।
- एक अनुमान के हिसाब से 2022 में करीब दो हजार रोहिंग्या मुस्लिम इंडोनेशिया और मलेशिया पहुंचे। UN की रिपोर्ट के हिसाब से पिछले साल 2 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों की समुद्री सफर के दौरान अलग-अलग वजहों से मौत हो गई।

कौन हैं रोहिंग्या मुस्लिम
- रोहिंग्या मुस्लिम प्रमुख रूप से म्यांमार के अराकान प्रांत में बसने वाले अल्पसंख्यक हैं। इन्हें सदियों पहले अराकान के मुगल शासकों ने यहां बसाया था।
- 1785 में बर्मा के बौद्ध लोगों ने देश के दक्षिणी हिस्से अराकान पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुस्लिमों का कत्ल कर उन्हें इलाके से बाहर खदेड़ दिया। इसी के बाद से बौद्ध धर्म के लोगों और रोहिंग्या मुस्लिमों के बीच से हिंसा और कत्लेआम का दौर शुरू हुआ, जो अब तक जारी है।

म्यांमार सरकार इन्हें नहीं मानती अपना नागरिक
म्यांमार में करीब 10 लाख रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं, लेकिन म्यांमार की सरकार इन लोगों को अपना नागरिक नहीं मानती है। इस तरह इन लोगों का कोई देश ही नहीं है। ये शुरुआत से ही भीषण दमन का सामना करते आ रहे हैं।
पिछले कुछ समय से देश में भीषण दंगे हुए, जिसमें जान-माल का सबसे ज्यादा नुकसान रोहिंग्या मुस्लिमों को ही उठाना पड़ा। इसके चलते ये बांग्लादेश और थाईलैंड की सीमा पर स्थित शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जहां इनकी हालत बहुत खराब है। बांग्लादेश की सीमा पर ही करीब 3 लाख रिफ्यूजी शरण लिए हुए हैं।

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