हाईकोर्ट में एक्ट्रेस कंगना रनौत के सपोर्ट में इस लिये उतरे उद्धव ठाकरे
हाईकोर्ट में एक्ट्रेस कंगना रनौत के सपोर्ट में इस लिये उतरे उद्धव ठाकरे
Mumbai | पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार और बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत के बीच जुबानी जंग से लेकर पुलिस और कोर्ट तक जंग देखने को मिलती रहीं है, लेकिन गुरुवार को एक मामले में महाराष्ट्र सरकार कंगना रनौत के समर्थन में कोर्ट में नजर आई.
दरअसल, महाराष्ट्र सरकार ने गुरुवार को बॉम्बे हाईकोर्ट में एक्ट्रेस कंगना रनौत के ट्विटर अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित किए जाने की मांग वाली याचिका का विरोध किया. सरकारी वकील वाई पी याग्निक ने कहा कि याचिकाकर्ता अली काशिफ खान देशमुख द्वारा की गयी मांगें अस्पष्ट हैं और याचिका को खारिज किया जाना चाहिए.
मुंबई के एक वकील देशमुख ने अपनी आपराधिक रिट याचिका में कहा कि ट्विटर के माध्यम से देश में नफरत फैलाने से रोकने के लिए रनौत के अकाउंट को स्थायी रूप से निलंबित या बंद करने का निर्देश दिया जाना चाहिए.
याचिकाकर्ता ने कहा कि ट्विटर जैसे मंच के दुरुपयोग को रोकने के लिए देश के दिशा-निर्देशों और कानूनों का पालन करने का भी निर्देश दिया जाना चाहिए. उन्होंने रनौत और उनकी बहन रंगोली चंदेल के कई विवादास्पद ट्वीट का हवाला दिया, जिनसे उन्होंने कथित तौर पर समुदायों और राज्य तंत्र के खिलाफ घृणा भड़काने की कोशिश की थी.
न्यायमूर्ति एस एस शिंदे और न्यायमूर्ति एम एस कर्णिक की खंडपीठ के समक्ष बहस करते हुए देशमुख ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों पुलिस और महाराष्ट्र के अधिकारियों को पत्र लिखकर रनौत और उनकी बहन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी.
देशमुख ने कहा, ”रनौत के खिलाफ कई एफआईआर लंबित है. पहले भी उन्होंने अपने फायदे के लिए अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत का दुरुपयोग किया है और वह अब किसानों के विरोध के साथ भी ऐसा कर रही हैं.” लेकिन जजों ने पूछा कि क्या यह याचिका जनहित याचिका (पीआईएल) है.
देशमुख द्वारा इनकार करने पर उन्होंने कहा कि फिर हम किसी तीसरे पक्ष द्वारा किए गए दावों के आधार पर आपराधिक मामले में कैसे कार्रवाई कर सकते हैं, जो किसी भी तरह से व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं है? क्या यह जनहित याचिका है? यदि नहीं, तो आपको व्यक्तिगत क्षति दिखानी होगी कि यह आपको कैसे प्रभावित कर रहा है. सरकारी वकील याग्निक ने दलील दी कि याचिका में यह नहीं बताया गया है कि याचिकाकर्ता द्वारा संदर्भित ट्वीट ने जनता को कैसे प्रभावित किया.
सरकारी वकील ने कहा, ”यह एक बहुत ही अस्पष्ट याचिका है. ट्विटर एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है. कोई भी इस तरह अस्पष्ट मांगें नहीं कर सकता है.” याग्निक ने कहा कि यह दलील सही नहीं है और इसका निपटारा किया जाना चाहिए.

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