शिंजो का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार 27 सितंबर को:मोदी-ओबामा शामिल हो सकते हैं; जापान के विपक्ष को कार्यक्रम पर ऐतराज

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार 27 सितंबर को होगा। पारिवारिक तौर पर शिंजो का अंतिम संस्कार 15 जुलाई को हो चुका है। लिहाजा, यह अंतिम संस्कार प्रतीकात्मक तौर पर होगा। इसकी वजह है कि निजी समारोह में राष्ट्राध्यक्ष शामिल नहीं हो सके थे। 27 सितंबर को होने वाले अंतिम संस्कार में PM मोदी और अमेरिका के पूर्व प्रधानमंत्री बराक ओबामा समेत कई बड़ी हस्तियां और राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो सकते हैं। आबे की जापान के नारा शहर में 8 जुलाई को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।

 

27 सितंबर को अंतिम विदाई का कार्यक्रम टोक्यो के किटानोमारू नेशनल गार्डन में होगा। इसमें आबे की अस्थियों का कलश और फोटो रखी जाएगी। यह आबे की प्रतीकात्मक अंतिम विदाई होगी। विपक्ष और कुछ संगठन सरकार पर टैक्स पेयर्स का पैसा बर्बाद करने के आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ, सरकार राजकीय अंतिम संस्कार के फैसले पर अड़ी है।

शिंजो आखिरी बार जब भारत आए थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। दोनों नेता काफी देर तक गले मिले।
शिंजो आखिरी बार जब भारत आए थे तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें अहमदाबाद एयरपोर्ट पर रिसीव किया था। दोनों नेता काफी देर तक गले मिले।

आबे का दूसरा राजकीय अंतिम संस्कार
आबे की हत्या 8 जुलाई को हुई थी। आबे तब एक चुनावी रैली में स्पीच दे रहे थे। उन्हें पीछे से गोली मारी गई थी। अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में उनकी मौत हो गई थी। हमलावर को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया था। भारत में भी एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया गया था। 27 सितंबर को आबे का राजकीय अंतिम संस्कार सेकंड वर्ल्ड वॉर के बाद किसी पूर्व प्रधानमंत्री का दूसरा राजकीय अंतिम संस्कार होगा। पहला राजकीय अंतिम संस्कार 1967 में शिगेरू योशिदा का हुआ था। योशिदा भी जापान के प्रधानमंत्री थे।

यह फोटो आबे के बचपन की है। यहां वे अपनी मां की गोद में (बीचों-बीच) बैठे हैं। उनके भाई हीरोनोबू भी पिता की गोद में बैठे हैं।
यह फोटो आबे के बचपन की है। यहां वे अपनी मां की गोद में (बीचों-बीच) बैठे हैं। उनके भाई हीरोनोबू भी पिता की गोद में बैठे हैं।

प्रतीकात्मक विदाई पर टैक्स पेयर्स की कमाई न खर्च करें

अमूमन जापान में रॉयल फैमिली और प्रधानमंत्रियों का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान या सरकारी खर्च पर नहीं किया जाता। ये परंपरा है। सभी फ्युनरल फंक्शन प्राइवेटली ऑर्गनाइज किए जाते हैं। आबे का राजकीय अंतिम संस्कार सरकार कर रही है। यही वजह है कि इसका विरोध हो रहा है। विपक्ष और आम जनता को लगता है कि सरकार के खर्च पर आबे का अंतिम संस्कार पैसे की बर्बादी है।

विपक्ष का कहना है कि आबे की राजनीतिक विचारधारा से सभी जापानी सहमत नहीं थे। लिहाजा, राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार में टैक्स पेयर्स की गाढ़ी कमाई खर्च न की जाए। जापान के प्रधानमंत्री फ्युमियो किशिदा ने खुद ऐलान किया था कि आबे का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। कोर्ट में राजकीय अंतिम संस्कार रोकने के लिए पिटीशन दायर की गई है।

राष्ट्राध्यक्षों को कार्यक्रम में बुलाना जरूरी

जापान सरकार के चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी और प्रधानमंत्री किशिदा के एडवाइजर हिरोकाजु मात्सुनो ने कहा- पारिवारिक तौर पर आबे का अंतिम संस्कार किया जा चुका है। वो जबरदस्त नेता थे। उन्होंने इकोनॉमी को बुलंदियों तक पहुंचाया। अमेरिका के साथ मिलकर देश की सुरक्षा को मजबूती दी।

मात्सुनो ने आगे कहा- 2011 में सुनामी समेत तीन आपदाएं आईं। इसके बाद भी आबे ने देश को डगमगाने नहीं दिया। इसलिए हम सेंट्रल टोक्यो के निप्पोन बुडोकान में 27 सितंबर को राजकीय सम्मान के साथ आबे के अंतिम संस्कार की रस्म पूरी करेंगी। यह कार्यक्रम बिल्कुल सादगी से होगा। जिन देशों ने शोक व्यक्त किया, उनके राष्ट्राध्यक्षों को इस कार्यक्रम में बुलाना बहुत जरूरी है।

0 comments

Leave a Reply