यूक्रेन के बखमुत पर रूसी कब्जा, पुतिन ने बधाई दी:यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की बोले- शहर पूरी तरह से तबाह हुआ

रूस की प्राइवेट आर्मी- वैगनर ग्रुप ने दावा किया है कि उन्होंने यूक्रेन के बखमुत शहर पर कब्जा कर लिया है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने अर्मी को बधाई दी है। वहीं, यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा- वहां कुछ नहीं बचा है, शहर पूरी तरह से तबाह हो चुका है।

 

20 मई को वैगनर के चीफ येवगेनी प्रिगोझिन (Yevgeny Prigozhin) ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए दावा किया था कि उन्होंने बखमुत कब्जा लिया है। हालांकि, तब यूक्रेन ने इस दावे को खारिज कर दिया था। अगस्त 2022 से इस शहर में रूसी और यूक्रेनी सेना के बीच लड़ाई जारी थी, ये पिछले 3 महीने से तेज हो गई थी।

BBC ने व्हाइट हाउस के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा कि बखमुत में जंग के दौरान 20-30 हजार रूसी सैनिक जान गवां चुके हैं।
BBC ने व्हाइट हाउस के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा कि बखमुत में जंग के दौरान 20-30 हजार रूसी सैनिक जान गवां चुके हैं।

24 फरवरी 2022 से जारी है जंग
रूसी सैनिकों ने यूक्रेन पर 24 फरवरी 2022 को हमला कर दिया था। इसके पीछे व्लादिमिर पुतिन का मकसद एक ही था- यूक्रेन पर कब्जा। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को ये मंजूर नहीं था, लिहाजा आज 452 दिन बाद भी ये जंग जारी है।

इस जंग में दोनों देशों को काफी नुकसान हुआ। इंफ्रास्ट्रक्चर और मिलिट्री इक्यिपमेंट्स तबाह हुए। पुख्ता आंकड़े तो नहीं हैं, लेकिन माना जाता है कि इस जंग में दोनों तरफ के हजारों सैनिक मारे जा चुके हैं।

बखमुत में बड़ी तादाद में सॉल्ट माइन्स है। यहां कि आबादी 70 हजार है। शहर पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है।
बखमुत में बड़ी तादाद में सॉल्ट माइन्स है। यहां कि आबादी 70 हजार है। शहर पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है।

अब तक यूक्रेन के 7 शहरों पर रूसी कब्जा...
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने ब्लैक सी ट्रेड रूट के ज्यादातर हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसके अलावा जंग की शुरुआत से अब तक रूस ने यूक्रेन की 18% जमीन पर कब्जा किया है। इस जमीन पर यूक्रेन के 6 बड़े शहर- सेवेरोडोनेट्स्क, डोनेट्स्क, लुहांस्क, जपोरिजिया, मारियुपोल और मेलिटोपोल बसे हैं। ये शहर यूक्रेन की इकोनॉमी को कंट्रोल करते हैं। वहीं, बखमुत 7वां शहर है जहां रूस का कब्जा हो चुका है।

कब्जे की वजह

  • यूक्रेन के इतने लंबे समय तक जंग में टिके रहने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और पश्चिमी देशों के हथियार और आर्थिक समर्थन है। दूसरी तरफ रूस है जो यूक्रेन को मिलने वाले पश्चिमी देशों के समर्थन का शुरू से विरोध करता रहा है।
  • अब यूक्रेन के 7 शहरों पर कब्जा करके रूस पश्चिमी देशों को ये संदेश देना चाहता है कि उसे रोकना मुश्किल है। ऐसा करके रूस ये दावा कर पाएगा कि यूक्रेन उसके क्षेत्र पर हमला कर रहा है और पश्चिमी देशों को भी निशाने पर लिया जा सकता है। 2014 में रूस ने इसी तरह क्रीमिया पर कब्जा जमाया था, जिसका पश्चिमी देशों ने विरोध किया था। इसके बाद भी क्रीमिया पर रूस का ही कब्जा है।
ये बखमुत की सैटेलाइट इमेज है। इसमें तबाही साफ नजर आ रही है।
ये बखमुत की सैटेलाइट इमेज है। इसमें तबाही साफ नजर आ रही है।

पहले कब्जा फिर सैनिकों की वापसी

  • यूक्रेन के कई शहर ऐसे भी हैं जिन पर रूस ने कब्जा कर लिया था, लेकिन बाद में यहां से अपने सैनिकों को वापस बुला लिया। 15 दिनों में जीत हासिल कर जंग खत्म करने का दावा करने वाले रूस ने हमले के एक महीने बाद ही यूक्रेन की राजधानी कीव से अपनी सेना के पीछे हटने के आदेश दे दिए थे। यहां से सैनिक वापस भी जाने लगे थे, लेकिन 8 महीने बाद अक्टूबर में रूस ने यहां हमले तेज कर दिए थे। हालांकि वो कीव पर अब तक कब्जा नहीं कर पाए हैं।
  • रूसी सैनिकों ने इजुम पर मार्च में कब्जा किया था। 7 महीने बाद सितंबर में यूक्रेनी सेना ने इसे रूस से छुड़ा लिया था, जिसके बाद रूसी सैनिकों की वापसी हो गई थी।
  • युक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव पर रूस ने मार्च में ही कब्जा कर लिया था। अक्टूबर में यहां से रूसी सैनिकों को वापस बुला लिया गया था।
  • खेरसॉन पर जंग के 5 दिन बाद ही रूस ने 2 मार्च को कब्जा कर लिया था। 7 महीवे बाद 9 नवंबर को पुतिन ने यहां से अपनी सेना को वापस बुला लिया।
  • 24 फरवरी को जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो उसने तभी साफ कर दिया था कि वो यूक्रेन की इकोनॉमी को तबाह कर देगा। इसी स्ट्रैटेजी के तहत रूसी सेना ने स्नेक आईलैंड पर भारी बमबारी की और उस पर कब्जा कर लिया। जुलाई में यहां से रूसी सैनिकों की वापसी हो गई थी।

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